IIT-दिल्ली ने तैयार की हल्की बुलेट प्रूफ जैकेट, कुछ नहीं कर पाएंगी AK-47 और स्नाइपर की गोलियां

IIT Delhi को नई सफलता मिली है। उसने नई तकनीक से जवानों के लिए वजन में काफी हल्की बुलेट प्रूफ जैकेट तैयार की है। अब वह इस जैकेट की तकनीक ट्रांसफर के लिए तैयार है। इस संबंध में डीन रिसर्च नरेश भटनागर ने बताया कि पूर्ण रूप से स्वदेशी बुलेट-प्रूफ जैकेट ABHED (एडवांस्ड बैलिस्टिक हाई एनर्जी डिफीट) IIT दिल्ली के डीआरडीओ इंडस्ट्री एकेडेमिया सेंटर ऑफ एक्सीलेंस (डीआइए-सीओई) में डिजाइन और विकसित की गई है।


यह Bullet प्रूफ जैकेट सबसे हल्की और कारगर है।

बुलेट प्रूफ जैकेट भारतीय सेना के लिए आठ AK-47 एचएससी और छह स्नाइपर एपीआई गोलियों को झेलने में सक्षम है। बीआईएस मानकों के अनुसार, बुलेट प्रूफ जैकेट की रिसर्च और डिजाइन की टेस्टिंग सफलतापूर्वक डीआरडीओ-टीबीआरएल चंडीगढ़ में की गई है और अब यह तकनीक ट्रांसफर के लिए तैयार है. वहीं, इस समय सैनिकों की ओर से इस्तेमाल की जा रही बुलेट-प्रूफ जैकेटों की तुलना ये 30 फीसदी हल्की बताई जा रही है।

जैकेट में सेकेंड जनरेशन फाइबर हुआ इस्तेमाल

फिलहाल भारतीय सैनिक जो बुलेट प्रूफ जैकेट पहनते हैं उनका वजन करीब 10.5 किलो होता है. संस्थान के शोधकर्ताओं का लक्ष्य रहा है कि जैकट का वजन 7.5 किलो तक पहुंचाया जाए। हालांकि IIT दिल्ली ने इसके सटीक वजन की जानकारी अभी नहीं दी है। नरेश भटनागर ने सितंबर 2019 में बताया था कि इस जैकेट का वजह कम करने का टारगेट 30 फीसदी घटाकर 7.5 किलोग्राम करना है। अब तक इसे 22 प्रतिशत तक कम करने में सफल रहे हैं।

नरेश भटनागर ने बताया था कि ने जैकेट को हल्का बनाने के लिए उनमें सेकेंड जनरेशन के फाइबर रिन्फोर्स्ड प्लास्टिक का उपयोग किया है। सेना मौजूदा समय में उसी मैटेरियल के पुराने वर्जन का उपयोग करती है। केवलर की जगह लेने वाले फाइबर प्लास्टिक का उपयोग लगभग एक दशक से किया जा रहा है।

DRDO लैब ने भी तैयार की थी हल्की जैकेट

यही नहीं अप्रैल 2021 में रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) लैब डिफेंस मैटेरियल्स एंड स्टोर्स रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टेब्लिशमेंट (डीएमएसआरडीई) कानपुर ने भारतीय सेना की गुणात्मक आवश्यकताओं को पूरा करते हुए 9.0 किलो वजन की बुलेट प्रूफ जैकेट बनाई थी। फ्रंट हार्ड आर्मस पैनल (एफएचएपी) जैकेट की टेस्टिंग टर्मिनल बैलिस्टिक अनुसंधान प्रयोगशाला चंडीगढ़ में की गई और इस टेस्टिंग ने प्रासंगिक बीआईएस मानकों को पूरा किया था। इस जैकेट के बनने के बाद रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ के वैज्ञानिकों को बधाई दी थी।

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